Affilated with Vikram University, Ujjain (M.P)

निवेदन

डॉ.विवेक नागर

प्राचार्य, ज्ञानमंदिर महाविद्यालय, नीमच

ज्ञानमंदिर महाविद्यालय निरंतर 51 वर्षो से विधि अध्यापन के क्षेत्र में अपनी उत्कृष्ट सेवाऐं प्रदान कर रहा है विक्रम विश्वविद्यालय में इस महाविद्यालय को एक श्रेष्ठ महाविद्यालय के रूप में पहचाना जाता है महाविद्यालय में विधि प्राध्यापक विद्यार्थी को अध्ययन में पूर्ण सहयोग प्रदान करते है। नियमित कक्षाओं के अलावा परीक्षा की तैयारी हेतु अतिरिक्त कक्षाऐं भी लगाई जाती है। स्टाॅफ के सक्रिय सहयोगी का ही परिणाम है कि इस महाविद्यालय के छात्र मेरिट लिस्ट में स्थान प्राप्त करते चले आ रहे है। (गत वर्ष एल.एल.बी. भाग-3 का परीक्षा परिणाम 92% रहा तथा एल.एल.बी. दिव्तीय वर्ष का परिणाम 84% रहा व एल.एल.बी. भाग-1 का परीक्षा परिणाम भी 87% रहा।) साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं खेल गतिविधियों में महाविद्यालय का विश्वविद्यालय में अपना स्थान रहा है। विधि के सुचारू अध्यापन हेतु अच्छे विधि प्राध्यापकों की सेवाएं ली जाती है इस महाविद्यालय का विधि के क्षेत्र में अपना विशिष्ट स्थान है महाविद्यालय के कई पूर्व छात्र विधि के क्षेत्रा में व अन्य कई क्षेत्रों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाये हुए है जिसकी सूची काफी लम्बी है यहां इतना कहना पर्याप्त होगा कि भारत वर्ष में विधि पुस्तकों के लेखक के रूप में ख्याति प्राप्त व कई सम्मानों से सम्मानित श्री बसंतीलाल जी बाबेल इसी महाविद्यालय के विधि के छात्र रहे है व विश्वविद्यालय की प्राविण्य सूची में प्रथम स्थान प्राप्त कर स्वर्ण पदक प्राप्त किया है। इसी प्रकार महाविद्यालय के छात्रा चचंल बाहेती ने भी वर्ष 2005-06 मे में प्राविण्य सूची में प्रथम स्थान प्राप्त कर स्वर्ण पदक प्राप्त किया है और महाविद्यालय का गौरव बढ़ाया है। वहीं वर्ष 2006-07 में महाविद्यालय के छात्र अभिषेक जैन ने विश्वविद्यालय की प्राविण्य सूची में प्रथम स्थान प्राप्त कर इस महाविद्यालय और नीमच को गौरवान्वित किया है। कु. चेतना गेहलोत ने वर्ष 2007-08 में व कु. वर्षा काछवाल ने 2008-09 में विश्वविद्यालय की प्राविण्य-सूची में क्रमशः आठवां व दसवां स्थान प्राप्त किया है। कु.यशा नाहर ने वर्ष 2011-12 मे विश्वविघालय की प्राविण्य सूची मे पाँचवा स्थान प्राप्त किया हैँ| हाल ही में महाविद्यालय कि पूर्व छात्रा कु. रूचिता गुर्जर का चयन व्यवहार न्यायाधीश वर्ग-2 के पदपर हुआ है।

पालकों से विशेष आग्रह

महाविद्यालय परिवार के द्वारा इस बात का सतत् प्रयास किया जाता है कि संस्था का वातावरण शुद्ध, मधुर एवं शांतिप्रिय रहें जैसा कि शैक्षणिक संस्था के लिये आवश्यक है इस महत्वपूर्ण कार्य में पालकों का सतत् सहयोग आवश्यक है|विद्यार्थियों को प्रवेश दिलाने के पश्चात् पालक अपने दायित्व की इति श्री हो गई है ऐसा समझ लेते है जो ठीक नहीं है| पालकों द्वारा विद्यार्थियों को दी गई समझाइश अध्यापकों द्वारा दिए गए निर्देशों की अपेक्षा अधिक प्रभावशाली होते हैं|पालक महाविद्यालय से सतत् संपर्क बनाये रखें ताकि उनका नियंत्रण भी उपयोगी भूमिका अदा कर सकें तथा कम उपस्थिति के कारण या अन्य किसी कारण या अनुशासन हीनता के कारण उत्पन्न स्थिति में विद्यार्थी को दण्डित करने की आवश्यकता ही ना पड़े। महाविद्यालय ऐसी संस्था है जहां आने वाली पीढि़यों का निर्माण होता है इसलिये उसकी शुद्धता, पवित्रता किसी धार्मिक स्थान से कम नहीं है। महाविद्यालय की शुद्धता और पवित्रता कायम रखनें में सहयोग करेंगे ऐसी अपेक्षा है।

बदलते परिवेश में विधि शिक्षा में गुणात्मक सुधार की अति आवश्कता है इसके लिये वि़द्यार्थियों का सहयोग व सक्रिय भागीदारी अपेक्षित है इसके बिना सफलता संभव नहीं है। वर्तमान में श्री मोहनलाल जी गर्ग शासीनिकाय के अध्यक्ष है एवं उनके मार्गदर्शन में यह महाविद्यालय निरंतर प्रगति कर रहा है एवं आगे भी करता रहेगा, मैं युवा पीढ़ी के उज्जवल भविष्य एवं उच्चस्तरीय विधि शिक्षा के लिये संकल्पित हूं।